About
सुपरिचित मैग्ज़ीन संपादक, प्रखर हिंदीसेवी और स्तंभकार। संपादन के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक का अनुभव। लंबे समय से दैनिक भास्कर के साप्ताहिक परिशिष्ट ‘मधुरिमा’ और मासिक पत्रिका ‘अहा! ज़िंदगी’ की संपादक हैं। दोनों प्रकाशनाें में पारिवारिक व नैतिक मूल्य, संस्कृति व पर्यावरण संरक्षण पर ख़ास ज़ोर रहता है। मधुरिमा में उनके चर्चित स्तंभ ‘दस्तक’ के पाठकों का दायरा काफ़ी व्यापक है। ‘बाल भास्कर’ और ‘यंग भास्कर’ जैसी पत्रिकाओं का दायित्व भी सँभाल चुकी हैं
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